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जर्नल एंट्री
जब कोई बिल या पेमेंट फ़िट न हो, जर्नल एंट्री रकम को खातों के बीच ले जाती है: दिया या मिला डिस्काउंट, लगाया गया ब्याज, बैड डेट को राइट-ऑफ़ करना, या कोई सुधार। डेबिट और क्रेडिट बराबर होने चाहिए।
स्टेप बाय स्टेप
- जर्नल एंट्री खोलें। मेन्यू › जर्नल एंट्री › नई जर्नल एंट्री।
- तारीख, नंबर और विवरण (नैरेशन)। नैरेशन में लिखें कि एंट्री क्यों की गई।
- लाइनें जोड़ें। हर लाइन के लिए खाता चुनें (पार्टी, कैश, बैंक, खर्चा, अन्य आमदनी, कैपिटल, ड्रॉइंग, लिया गया लोन, दिया गया लोन या एडवांस, फ़िक्स्ड एसेट, बिक्री, खरीद, TDS रिसीवेबल, TDS पेएबल, GST इनपुट या आउटपुट CGST/SGST/IGST, राउंड ऑफ़), पार्टी हो तो पार्टी का नाम, और रकम Dr या Cr के नीचे। और लाइन के लिए लाइन जोड़ें दबाएँ।
- टोटल जाँचें। नीचे की लाइन Dr और Cr दिखाती है; सेव करने से पहले दोनों बराबर होने चाहिए।
- सेव करें। एंट्री लेजर और ट्रायल बैलेंस में तुरंत दिखती है।
उदाहरण से समझें
Verma Paints ₹3,700 देते हैं और ₹3,726 के बिल के आखिरी ₹26 आप छोड़ देते हैं। ₹3,700 पैसा मिला में लिखें, फिर जर्नल एंट्री: Dr खर्चा "Discount allowed" ₹26, Cr पार्टी Verma Paints ₹26। उनका बैलेंस शून्य हो जाता है।
एक ग्राहक जिस पर ₹2,000 बाकी थे, उसका काम बंद हो गया: Dr खर्चा "Bad debts" ₹2,000, Cr पार्टी ₹2,000।
आम गलतियाँ और उन्हें कैसे ठीक करें
- कैश पेमेंट के लिए जर्नल इस्तेमाल करना। पैसा दिया या खर्चा इस्तेमाल करें; ये कैश बुक ठीक से अपडेट करते हैं।
- कैपिटल या लोन हाथ से जर्नल में डालना। कैपिटल और लोन इस्तेमाल करें: यह सही खातों के साथ जर्नल एंट्री खुद बना देता है।
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