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पार्टनरशिप फर्म और LLP के अकाउंट

पार्टनरशिप फर्म या LLP के लिए ऐप नेट प्रॉफ़िट पार्टनरों में बाँटता है: कैपिटल पर ब्याज, पार्टनर्स की सैलरी, फिर बाकी प्रॉफ़िट रेशियो में, और हर पार्टनर का कैपिटल अकाउंट रखता है।

स्टेप बाय स्टेप

  1. बिज़नेस का प्रकार और पार्टनर सेट करें। मेरा डेटा › मेरे बिज़नेस › बिज़नेस बदलें: बिज़नेस का प्रकार पार्टनरशिप फर्म या LLP, फिर हर पार्टनर का नाम, शेयर %, साल का ब्याज % और साल की सैलरी।
  2. पार्टनर के हिसाब से कैपिटल और ड्रॉइंग लिखें। कैपिटल और लोन में मालिक या पार्टनर का नाम में पार्टनर का नाम लिखें।
  3. पार्टनर्स के अकाउंट खोलें। फ़ाइनल अकाउंट्स › और अकाउंट्स › पार्टनर्स के अकाउंट, अवधि चुनें।
  4. एप्रोप्रिएशन और कैपिटल अकाउंट पढ़ें। नेट प्रॉफ़िट, कैपिटल पर ब्याज, पार्टनर्स की सैलरी, प्रॉफ़िट रेशियो में बँटा प्रॉफ़िट; फिर हर पार्टनर का ओपनिंग, लाई गई कैपिटल, ब्याज, सैलरी, प्रॉफ़िट का हिस्सा, ड्रॉइंग और क्लोज़िंग।

उदाहरण से समझें

नेट प्रॉफ़िट ₹6,00,000। पार्टनर A और B, कैपिटल ₹10,00,000 और ₹5,00,000, ब्याज 12%, सैलरी ₹1,20,000 हर एक, प्रॉफ़िट रेशियो 1:1। ब्याज: A ₹1,20,000, B ₹60,000। सैलरी ₹2,40,000। बचा: ₹6,00,000 − ₹1,80,000 − ₹2,40,000 = ₹1,80,000, हर एक को ₹90,000।

नियम और तारीखें

इनकम टैक्स कैपिटल पर साल का 12% तक ब्याज और पार्टनर्स का रेम्यूनरेशन सिर्फ़ बुक प्रॉफ़िट पर निकली सीमा में मानता है, और तभी जब पार्टनरशिप डीड में इसकी इजाज़त हो (section 40(b), Income-tax Act, 1961, जो Income-tax Act, 2025 में भी है)। ऐप संकेत और चेतावनी दिखाता है पर इन्हें लागू नहीं करता; अपने अकाउंटेंट से जाँच लें।

आम गलतियाँ और उन्हें कैसे ठीक करें

अभी इस्तेमाल करें: यह फ़्री है और लॉगिन की ज़रूरत नहीं।ऐप खोलें

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