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खर्चे लिखें

किराया, बिजली, फ़्यूल, कैश में दी सैलरी, चाय और मरम्मत: वे लागतें जो बेचने के माल की खरीद नहीं हैं। हर खर्चा मुनाफ़ा घटाता है, और बिल सही हो तो उसका GST क्लेम हो सकता है।

स्टेप बाय स्टेप

  1. फ़ॉर्म खोलें। डैशबोर्ड › जल्दी जोड़ें › खर्चा, खरीद और खर्चे › खर्चा, या E दबाएँ।
  2. तारीख, खर्चे का प्रकार और रकम (₹)। खर्चे का प्रकार लिखें (किराया, बिजली, फ़्यूल…)। हर बार वही शब्द लिखें, ताकि रिपोर्ट में ये एक साथ जुड़ें।
  3. कैसे दिया। कैश, UPI, चेक, बैंक ट्रांसफ़र, कार्ड, डिमांड ड्राफ़्ट, अन्य, या अभी नहीं दिया (उधार)।
  4. किसको दिया और बिल / रसीद नं.। आपने किसे दिया और उनका बिल नंबर।
  5. GST। अगर बिल पर GST है तो रकम में GST शामिल (%) चुनें। अगर GST इनवॉइस आपके नाम पर है तो इस GST पर मैं इनपुट टैक्स क्रेडिट लूँगा टिक करें, और दूसरे राज्य का हो तो दूसरे राज्य से बिल (IGST)।
  6. सेव करें। यह खरीद और खर्चे, कैश या बैंक बुक और लाभ-हानि में दिखता है।

उदाहरण से समझें

बिजली का बिल ₹1,850 UPI से दिया। बिजली पर GST नहीं लगता, इसलिए GST खाली छोड़ें। दुकान का किराया ₹8,000 कैश में ऐसे मकान-मालिक को दिया जो GST रजिस्टर्ड नहीं: इस पर भी GST नहीं। दोनों लाभ-हानि में खर्चों के नीचे आते हैं: बिजली ₹1,850 और किराया ₹8,000।

GST 18% शामिल ₹1,180 का मरम्मत बिल: ऐप इसे ₹1,000 + ₹180 GST में बाँटता है; ITC टिक हो तो ₹180 इनपुट टैक्स क्रेडिट बनता है और सिर्फ़ ₹1,000 खर्चा है।

आम गलतियाँ और उन्हें कैसे ठीक करें

अभी इस्तेमाल करें: यह फ़्री है और लॉगिन की ज़रूरत नहीं।ऐप खोलें

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